भारत का राष्ट्रीय ध्वज और प्रतीक हमारे देश की एकता, स्वतंत्रता और पहचान के सबसे बड़े प्रतीक माने जाते हैं। यह केवल कागज़, कपड़े या चिन्ह भर नहीं हैं, बल्कि ये उस गहरी भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं जो हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रप्रेम के रूप में बसती है। जब भी हम भारत का राष्ट्रीय ध्वज लहराते हुए देखते हैं या राष्ट्रीय प्रतीकों का उपयोग करते हैं, तो हमें अपने इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और उन बलिदानों की याद आती है जिन्होंने इस देश को आज़ाद करवाया।भारत का राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास और प्रतीक न सिर्फ भारतीय संविधान और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े हैं, बल्कि ये हमारे देश की सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी दर्शाते हैं। इस पोस्ट के जरिये हम भारत का राष्ट्रीय ध्वज के बारे में विस्तार से जानेंगे|
भारत का राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास – (History Of Indian National Flag)
तिरंगे का इतिहास:
भारत का तिरंगा सिर्फ एक ध्वज नहीं, यह हमारे देश की स्वतंत्रता, त्याग, बलिदान और एकता का प्रतीक है। आज हम जिस राष्ट्रीय ध्वज को गर्व से फहराते हैं, उसके पीछे एक लंबा संघर्ष, गहरा अर्थ और ऐतिहासिक बदलाव छिपे हुए हैं। तिरंगे को बनाने में कई लोगों का योगदान रहा और यह कई चरणों से गुजरकर आज के स्वरूप तक पहुँचा है।
1. सबसे पहला भारतीय झंडा (1906)
भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त 1906 को कोलकाता के पारसी बागान में फहराया गया था।
इसमें तीन क्षैतिज पट्टियाँ थीं—
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शीर्ष पर हरा,
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बीच में पीला,
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और नीचे लाल रंग।
प्रत्येक पट्टी पर अलग-अलग प्रतीक बने थे, जैसे सूरज, सितारे आदि। यह जनभावनाओं का प्रतीक था लेकिन इसे आधिकारिक मान्यता नहीं मिली।
2. दूसरा झंडा (1907 – स्टटगार्ट में फहराया गया)
वर्साय कम्यून की भारतीय क्रांतिकारी मैडम भीकाजी कामा ने 1907 में यूरोप में भारत का एक अलग ध्वज फहराया।
इसमें भी तीन रंग थे—केसरिया, पीला और हरा—लेकिन इसके बीच में “वंदे मातरम्” लिखा हुआ था। यह ध्वज अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्वतंत्रता की आवाज बना।
3. तीसरा रूप (1917 – लोकमान्य तिलक का प्रयास)
1917 में लोकमान्य तिलक और एनी बेसेंट ने होमरूल आंदोलन के दौरान एक नया झंडा अपनाया।
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इसमें पाँच लाल और चार हरी पट्टियाँ थीं।
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बाएँ कोने में ब्रिटिश झंडा और बीच में सफ़ेद चाँद व सितारा था।
यह झंडा भारत के आत्मनिर्भर शासन की माँग का प्रतीक बना।
4. चौथा झंडा (1921 – महात्मा गांधी का सुझाव)
1921 में बीजू पटनायक और एक युवक पिंगाली वेंकैया ने ऐसा झंडा बनाया जिसे गांधी जी ने भी स्वीकार किया।
इस ध्वज के रंग थे—
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ऊपर लाल (हिन्दू समाज),
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नीचे हरा (मुस्लिम समाज),
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बीच में चर्खा, जो मेहनत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक था।
बाद में इसमें सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व लाने के लिए सफेद रंग जोड़ा गया।
6. स्वतंत्र भारत का तिरंगा (22 जुलाई 1947)
22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया।
मुख्य बदलाव:
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चर्खे की जगह अशोक चक्र जोड़ा गया।
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चक्र में 24 तीलियाँ रखी गईं, जो निरंतर प्रगति, सत्य, न्याय और गति का प्रतीक हैं।
रंगों का अर्थ:
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केसरिया: साहस, त्याग और नेतृत्व
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सफेद: शांति, सत्य और पवित्रता
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हरा: समृद्धि, विकास और जीवन
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अशोक चक्र: धर्म, सत्य और निरंतर प्रगति
पिंगली वेंकैया और तिरंगे का डिजाइन:
इस ऐतिहासिक प्रतीक के मूल निर्माता थे—पिंगली वेंकैया, जिन्हें राष्ट्रध्वज का जनक कहा जाता है। उनके योगदान के बिना आज हम जिस तिरंगे पर गर्व करते हैं, वह अस्तित्व में नहीं होता। इस लेख में हम पिंगली वेंकैया के जीवन, उनके झंडा डिजाइन, तिरंगे के विकास और स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज बनने तक की पूरी कहानी विस्तार से जानेंगे।
1. पिंगली वेंकैया कौन थे? – एक महान लेकिन भूले हुए नायक
पिंगली वेंकैया का जन्म 2 अगस्त 1876 को आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम (अब कृष्णा जिले) में हुआ था। वे एक साधारण किसान परिवार से थे, लेकिन उनकी सोच बिल्कुल असाधारण थी। वे कई प्रतिभाओं से भरपूर थे—
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कृषि वैज्ञानिक
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भाषाविद
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स्वतंत्रता सेनानी
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झंडों के अध्येता
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रंगों के विशेषज्ञ
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सेना के पूर्व अधिकारी
वेंकैया जी ने युवा अवस्था में ब्रिटिश सेना में भी सेवा की थी और दक्षिण अफ्रीका में बोअर युद्ध में भाग लिया था। यहीं रहते हुए उन्होंने पहली बार झंडों के महत्व को समझा। उन्होंने महसूस किया कि हर देश का एक ध्वज होता है जो वहां के लोगों की पहचान और एकता का प्रतीक होता है। लेकिन भारत के पास ऐसा कोई राष्ट्रीय ध्वज नहीं था।
यही बात उनके मन में गहराई से बैठ गई और आगे चलकर उन्होंने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य—भारत के लिए झंडा—तैयार किया।
2. भारत के लिए एक अलग झंडे की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?
20वीं सदी की शुरुआत में भारत स्वतंत्रता आंदोलन से गुजर रहा था।
देश भर में विरोध, सत्याग्रह, सभाएँ, आंदोलन और रैलियाँ हो रही थीं। लेकिन एक बड़ी कमी थी—एक राष्ट्रीय प्रतीक की।
एक ऐसा झंडा जो लोगों में एकता का संदेश दे सके और स्वतंत्रता आंदोलन को स्पष्ट पहचान दे सके।
लोग विभिन्न प्रकार के झंडे इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन कोई भी सर्वमान्य नहीं था। पिंगली वेंकैया ने महसूस किया कि स्वतंत्र भारत का भी अपना एक विशिष्ट ध्वज होना चाहिए।
उन्होंने झंडों का विस्तृत अध्ययन किया। दुनिया के लगभग सभी प्रमुख देशों के ध्वजों के डिजाइन, रंगों और अर्थ को समझा।
और इसी अध्ययन से भारत के लिए झंडे का पहला विचार जन्मा।
3. 1916 – पिंगली वेंकैया का पहला झंडा डिजाइन
1916 में वेंकैया जी ने भारत का पहला झंडा डिजाइन किया और उसे गांधी जी के समक्ष प्रस्तुत किया।
इस डिजाइन में तीन महत्वपूर्ण बातें शामिल थीं—
1️⃣ ऊपर लाल रंग – हिन्दू समुदाय का प्रतीक
2️⃣ नीचे हरा रंग – मुस्लिम समुदाय का प्रतीक
3️⃣ बीच में चर्खा – स्वराज, श्रम और आत्मनिर्भरता का प्रतीक
उस समय भारत में दो बड़े समुदायों—हिंदू और मुसलमान—के बीच एकता की भावना बढ़ाने की आवश्यकता थी। वेंकैया का डिजाइन दोनों को एक झंडे के तहत साथ लाने की कोशिश करता था।
गांधी जी को यह विचार बहुत पसंद आया। उन्होंने न सिर्फ इसे सराहा, बल्कि इसे भारत के भविष्य के झंडे के रूप में स्वीकार भी किया।
4. झंडे में सफेद रंग जोड़ने की कहानी
पहले डिजाइन में केवल दो रंग थे—लाल और हरा। लेकिन कई नेताओं ने सुझाव दिया कि भारत केवल दो धर्मों का देश नहीं है।
यहाँ सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और अन्य अनेक समुदाय रहते हैं। इसलिए झंडे को सभी का प्रतिनिधित्व करना चाहिए।
इसी सुझाव पर पिंगली वेंकैया ने झंडे के बीच में सफेद रंग जोड़ा।
सफेद रंग का अर्थ था—
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शांति
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सत्य
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सर्वधर्म समभाव
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संतुलन
इस तरह भारत का झंडा सभी भारतीयों की भावनाओं का प्रतिनिधि बन गया।
5. 1921 का संशोधित झंडा – गांधी जी द्वारा स्वीकृत
1921 में विजयवाड़ा के कांग्रेस अधिवेशन में पिंगली वेंकैया ने अपना संशोधित झंडा प्रस्तुत किया। इसमें—
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ऊपर लाल,
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बीच में सफेद,
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नीचे हरा,
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और बीच में चर्खा था।
गांधी जी ने इसे भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार कर लिया।
यह तिरंगा भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बन गया।
6. 1931 का तिरंगा – जिसे आज का आधार माना जाता है
1931 में कांग्रेस ने एक नया तिरंगा अपनाया।
इसका रूप था—
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ऊपर केसरिया (त्याग और साहस)
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बीच में सफेद (सत्य और शांति)
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नीचे हरा (उन्नति और समृद्धि)
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बीच में चर्खा
यह तिरंगा बाद में स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज का आधार बना।
1931 का तिरंगा साफ-सुथरा, सरल और गहरे अर्थ देने वाला था।
7. 1947 – स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज बनने की कहानी
22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रीय ध्वज को आधिकारिक रूप से स्वीकृति दी।
इसमें केवल एक बदलाव किया गया—
चर्खे की जगह अशोक चक्र जोड़ा गया।
अशोक चक्र क्यों?
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यह धर्मचक के सिद्धांतों पर आधारित है
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न्याय, सत्य और प्रगति का प्रतीक है
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इसमें 24 तीलियाँ हैं—24 गुण और 24 घंटे—निरंतर गति का संदेश
रंग वही रखे गए—
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केसरिया – साहस और त्याग
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सफेद – सत्य, शांति और धर्म
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हरा – विकास और जीवन
इस प्रकार तिरंगा पिंगली वेंकैया की मूल अवधारणा पर ही आधारित रहा, और यह नया चक्र भारत के मूल्यों का प्रतीक बन गया।
22 जुलाई 1947 को संविधान सभा में अपनाया गया:
भारत के स्वतंत्र होने से कुछ ही दिन पहले, 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने आधिकारिक रूप से भारत के राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) को अपनाया। इसमें केसरिया रंग साहस और त्याग का, सफेद रंग शांति और सत्य का, हरा रंग जीवन और समृद्धि का प्रतीक बना। बीच में बना अशोक चक्र राष्ट्र की निरंतर गति, प्रगति और धर्मचक्र का प्रतिनिधित्व करता है। उस दिन से लेकर आज तक तिरंगा न केवल भारत की स्वतंत्रता और संप्रभुता का प्रतीक है, बल्कि यह हर भारतीय के गौरव और सम्मान की पहचान भी बन चुका है।
तिरंगे के रंगों का महत्व
हमारा राष्ट्रीय ध्वज केवल एक कपड़े का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की भावनाओं, त्याग और संघर्ष की पहचान है। इसके तीन रंग – केसरिया, सफेद और हरा – हर एक का अपना विशेष महत्व है। इन रंगों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और आदर्शों का गहरा संदेश छिपा हुआ है। आइए विस्तार से समझते हैं –
केसरिया (त्याग और साहस)
ऊपरी भाग का केसरिया रंग त्याग, बलिदान और साहस का प्रतीक है। यह रंग हमें उन वीर शहीदों की याद दिलाता है जिन्होंने भारत माता की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। केसरिया हमें सिखाता है कि देशहित को सर्वोपरि मानते हुए निस्वार्थ भाव से कार्य करना ही सच्ची देशभक्ति है। यह रंग साहस और निर्भीकता का प्रतीक भी है, जो हर भारतीय को कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत से आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
सफेद (शांति और सत्य)
मध्य भाग का सफेद रंग शांति, पवित्रता और सत्य का प्रतीक है। यह हमें अहिंसा और सद्भाव का संदेश देता है, जो हमारे स्वतंत्रता संग्राम का मूल आधार रहा है। महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए हमें यह सिखाया कि बिना हिंसा के भी आज़ादी पाई जा सकती है। सफेद रंग यह भी दर्शाता है कि हमें अपने जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और सत्य को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए।
हरा (समृद्धि और जीवन)
ध्वज के निचले हिस्से का हरा रंग जीवन, समृद्धि और उन्नति का प्रतीक है। यह रंग भारतीय कृषि, प्रकृति और हरियाली से गहरे रूप से जुड़ा है। हरा रंग हमें यह याद दिलाता है कि भारत की असली ताकत उसकी उपजाऊ भूमि और मेहनतकश किसान हैं। यह हमें विकास और प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण और संतुलित जीवन जीने का संदेश देता है।
👉 इस प्रकार तिरंगे के तीनों रंग भारत की आत्मा को दर्शाते हैं – साहस, सत्य और समृद्धि। यही कारण है कि राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश की पहचान, गर्व और एकता का सर्वोच्च प्रतीक है।
अशोक चक्र का महत्व
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के मध्य में स्थित अशोक चक्र हमारे राष्ट्र की आत्मा का प्रतीक है। यह गहरे नीले रंग का चक्र न केवल भारत के गौरवशाली इतिहास से जुड़ा है, बल्कि हमारे जीवन मूल्यों और आदर्शों का भी संदेश देता है। इसे ध्वज के सफेद भाग में स्थान दिया गया है ताकि यह हमेशा सबके सामने स्पष्ट दिखाई दे और हमें अपने कर्तव्यों की याद दिलाता रहे।
24 तीलियाँ और धर्मचक्र
अशोक चक्र में कुल 24 तीलियाँ होती हैं। ये तीलियाँ दिन के 24 घंटे का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो हमें लगातार आगे बढ़ते रहने, कर्म करते रहने और समय का सम्मान करने का संदेश देती हैं। यह चक्र मूल रूप से सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के सिंह स्तंभ से लिया गया है, जिसे सम्राट अशोक ने बनवाया था। यह धर्मचक्र बौद्ध धर्म की शिक्षाओं का प्रतीक है, जो हमें धर्म, नीति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
सत्य और न्याय का प्रतीक
अशोक चक्र हमें यह याद दिलाता है कि सत्य और न्याय ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत हैं। यह हमें कर्मयोगी बनने और कर्तव्यनिष्ठ रहने की प्रेरणा देता है। चक्र का निरंतर घूमना यह दर्शाता है कि जीवन में ठहराव नहीं होना चाहिए। हमें हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए और अन्याय, असत्य तथा बुराई के खिलाफ खड़े होने का साहस रखना चाहिए।
👉 इस प्रकार, अशोक चक्र केवल एक डिजाइन नहीं, बल्कि यह अनुशासन, सत्य, न्याय और निरंतर प्रगति का प्रतीक है, जो हर भारतीय को प्रेरित करता है।
राष्ट्रीय ध्वज और प्रतीकों का महत्व
भारत का राष्ट्रीय ध्वज और अन्य राष्ट्रीय प्रतीक केवल पहचान का साधन नहीं हैं, बल्कि ये हमारी एकता, संस्कृति और स्वतंत्रता की गाथा को दर्शाते हैं। ये हमें हमारे गौरवशाली इतिहास और बलिदानों की याद दिलाते हैं। हर भारतीय के लिए राष्ट्रीय ध्वज और प्रतीकों का महत्व असीमित है क्योंकि ये हमारे राष्ट्र की आत्मा और मूल्यों को प्रकट करते हैं।
1. एकता और अखंडता का प्रतीक
राष्ट्रीय ध्वज और प्रतीक हमें यह संदेश देते हैं कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। चाहे भाषा, धर्म या संस्कृति कितनी भी अलग क्यों न हों, इन प्रतीकों के माध्यम से पूरा देश एक धागे में बंधा हुआ महसूस करता है।
👉 तिरंगे के तीन रंग और अशोक चक्र हमें यही याद दिलाते हैं कि हर भारतीय समान है और राष्ट्र की अखंडता सर्वोपरि है।
2. राष्ट्र के गौरव और पहचान का आधार
किसी भी देश की पहचान उसके राष्ट्रीय प्रतीकों से होती है।
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तिरंगा देखकर ही भारत की छवि बनती है।
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राष्ट्रीय पशु, पक्षी, फूल और गीत हमारी संस्कृति और परंपरा को दर्शाते हैं।
ये प्रतीक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को विशिष्ट पहचान दिलाते हैं और हमें गर्व का अहसास कराते हैं।
3. स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरणा का स्रोत
स्वतंत्रता संग्राम के समय तिरंगा और वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रीय प्रतीक क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा बने।
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झंडे के नीचे लड़ते हुए अनेक वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी।
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“वंदे मातरम्” और “जन गण मन” जैसे गीतों ने जन-जन में जोश और बलिदान की भावना जगाई।
👉 आज भी, जब हम ध्वज फहराते हैं या राष्ट्रीय गीत गाते हैं, तो वही भावना हमारे दिलों में जाग उठती है।
✍️ इस तरह, राष्ट्रीय ध्वज और प्रतीक न केवल हमारे गौरव के प्रतीक हैं, बल्कि ये हमें एकजुट रहने, राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने और बलिदान करने की प्रेरणा भी देते हैं।
प्रतियोगी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर (Important GK Questions)
1. भारत का राष्ट्रीय ध्वज कब अपनाया गया?
उत्तर: भारत का राष्ट्रीय ध्वज 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा आधिकारिक रूप से अपनाया गया।
2. तिरंगे का डिजाइन किसने बनाया?
उत्तर: भारत का तिरंगा डिजाइन पिंगली वेंकैया ने तैयार किया था।
3. अशोक चक्र में कितनी तीलियाँ होती हैं?
उत्तर: अशोक चक्र में कुल 24 तीलियाँ होती हैं।
4. “सत्यमेव जयते” किस उपनिषद से लिया गया है?
उत्तर: “सत्यमेव जयते” मुंडक उपनिषद से लिया गया है।
5. भारत का राष्ट्रीय पक्षी कौन है?
उत्तर: भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर (Peacock) है।
6. भारत का राष्ट्रीय पशु कौन है?
उत्तर: भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ (Tiger) है।
7. भारत का राष्ट्रीय फूल कौन है?
उत्तर: भारत का राष्ट्रीय फूल कमल (Lotus) है।
8. भारत का राष्ट्रीय गान किसने लिखा?
उत्तर: भारत का राष्ट्रीय गान “जन गण मन” रवींद्रनाथ ठाकुर ने लिखा था।
9. वंदे मातरम् के लेखक कौन हैं?
उत्तर: वंदे मातरम् के लेखक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय हैं।
10. भारत का राष्ट्रीय चिन्ह किस स्थान से लिया गया है?
उत्तर: भारत का राष्ट्रीय चिन्ह सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ से लिया गया है।
रोचक तथ्य (Interesting Facts)
1. सबसे ऊँचा राष्ट्रीय ध्वज कहाँ फहराया गया?
भारत का सबसे ऊँचा राष्ट्रीय ध्वज अटारी-वाघा सीमा, पंजाब में स्थित है। यह झंडा लगभग 360 फीट ऊँचा है और इसे हर भारतीय नागरिक गर्व के साथ देख सकता है। इस झंडे का आकार विशाल है और इसे फहराते समय राष्ट्रीय गौरव की अनुभूति होती है।
2. स्वतंत्रता संग्राम में झंडे की भूमिका
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय ध्वज केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं था, बल्कि यह क्रांति और एकता का प्रतीक बन गया था।
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अलग-अलग समूह और आंदोलन तिरंगे के नीचे एकजुट होकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज़ उठाते थे।
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झंडा स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत था और हिम्मत बढ़ाता था।
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कई आंदोलनों में तिरंगे और वंदे मातरम् जैसे प्रतीक अहिंसात्मक संघर्ष के प्रतीक बने।
3. ध्वज संहिता (Flag Code of India) और उससे जुड़े नियम
Flag Code of India भारत सरकार द्वारा जारी नियमों का संग्रह है, जो यह तय करता है कि राष्ट्रीय ध्वज को कैसे फहराया और सम्मानित किया जाए।
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राष्ट्रीय ध्वज को साफ और अचिह्नित रखना आवश्यक है।
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झंडे को रात में केवल उचित प्रकाश के साथ फहराया जा सकता है।
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किसी निजी या वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए झंडे का उपयोग करना वर्जित है।
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राष्ट्रीय ध्वज के नीचे पैर रखना, गंदा करना या अपमानजनक तरीके से फहराना कानूनी अपराध है।
💡 ये नियम सुनिश्चित करते हैं कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज और प्रतीक हमेशा सम्मानित और सुरक्षित रहे।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. भारत का राष्ट्रीय ध्वज कब अपनाया गया?
👉 22 जुलाई 1947 को।
Q2. भारत का राष्ट्रीय ध्वज किसने बनाया था?
👉 पिंगली वेंकैया ने।
Q3. अशोक चक्र में कितनी तीलियाँ होती हैं?
👉 24।
Q4. “सत्यमेव जयते” कहाँ से लिया गया है?
👉 मुंडक उपनिषद से।
Q5. भारत का राष्ट्रीय चिन्ह किस स्तंभ से लिया गया है?
👉 सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ से।
Disclaimer
यह लेख केवल शैक्षिक और जानकारीपूर्ण उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी सामान्य स्रोतों, इतिहास पुस्तकों और दस्तावेज़ों पर आधारित है। परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न भिन्न हो सकते हैं। पाठकों से अनुरोध है कि अधिकृत पुस्तकों और सरकारी स्रोतों का भी संदर्भ लें।
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